बिहार पुलिस के नाक में दम करने वाले सोना लुटेरे, बिहार के बाहर भी सोना लूट के घटना को अंजाम दे कर कई राज्यों के पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं.
REPORT : Arun Srivastava
बिहार में नेटवर्किंग मार्केटिंग के तर्ज पर फैला सोना चांदी लूट गिरोह के सदस्य, अब हाल के वर्षों में रक्तबीज की तरह जिले – जिले में पनपने लगे हैं. एक गिरोह पर पुलिस कार्रवाई करती है तो दूसरा गिरोह तैयार हो जाता है नए अपराध करने के लिए.
सुबोध सिंह एक ऐसा नाम है जो बिहार हीं नहीं कई राज्यों में सोना लूट का बड़ा गिरोह बना लिया है. पुलिस सूत्रों की मानें तो अब तक पांच सौ (500 KG) से अधिक का सोना लूट चुका है सुबोध सिंह का गिरोह.
#जेल में ही तैयार होते नए नए लड़के – 570 पार गिरोह के सदस्य
नालंदा निवासी सुबोध सिंह गिरोह में करीब 570 सदस्य अभी तक बन चुके हैं. अनुमानित सदस्य रक्तबीज के तर्ज पर जिलों में फैले हुए हैं, वहीं इसी गिरोह के सदस्य देश के दूसरे राज्यों में भी स्थापित हो चुके हैं. नए लड़को को जेलों के अंदर चार लेयर की दी जा रही है ट्रेनिंग. इनमे रेकी करना, लूट के घटना को अंजाम देना और फिर लूट के बाद कैसे कहाँ सोना को ठिकाने लगाना है. हद तो ये है गिरोह के सदस्यों की गिरफ़्तारी अगर हो जाती है तो प्रमुख रूप से ज्यादा मात्रा में लूटा गया सोना कहाँ ठिकाने लगाया गया है वह गिरोह के सदस्य पुलिस को नहीं देते जानकारी.
नए नए लड़को से नए नए जिले और राज्य में घटना कारित करा दिया जाता अंजाम. पुलिस सूत्रों की माने तो CCTV से शिनाख्त न कर सके पुलिस टीम, इस वजह से नए नए लड़को से कराया जाता लूट. सरगना सुबोध गिरोह के प्रमुख सदस्य देते हैं लुटेरों को चार चक्के वाहन के साथ बैकअप.

#सुबोध सिंह का उत्तर बिहार में जबरदस्त नेटवर्क – देखें प्रमुख सदस्य कौन?
मुजफ्फरपुर में सकरा, सदर, साहेबगंज, अहियापुर, कांटी थाना क्षेत्र में सुबोध सिंह से जुड़े सदस्य हैं.
वैशाली के लालगंज इलाके में वीरेंद्र शर्मा, हाजीपुर में विकास झा, बिद्दूपुर का धर्मेंद्र गोप, जॉन राइट, पीयूष, सुजीत राय, प्रशांत उर्फ़ राजा पंडित, शिवम् कुमार, प्रेम राज यादव, नीतिराज उर्फ़ प्रिंस, विपिन कुमार, शिवशेक रंजन,
अन्य सदस्य की बात करें तो प्रमुख रूप से शुभम तिवारी, अमित, अंकुर साहू, अर्जुन, सन्नी सिंह, रमेश ठाकुर, आशिफ, गुणजन सिंह उर्फ़ राहुल उर्फ़ राघव अखिलेश, दिलीप सिंह, समस्तीपुर का राजीव सिंह उर्फ़ पुल्लू, रोहित उर्फ़ आर्यन, अन्नू ऐसे दर्जनों नहीं करीब 60 अपराधकर्मी ऐसा है जो सुबोध सिंह से सीधे तौर पर जुड़ा है वहीं इन 60 प्रमुख सदस्यों के अंदर 7 से 10 युवक सोना लूट गिरोह से जुड़े हैं.

बनाया था अलग गिरोह AK 47 के चक्कर में मारा गया
सुबोध सिंह गिरोह का एक प्रमुख सदस्य था कुख्यात मनीष, मनीष सुबोध सिंह के लिए काम करते करते अपना अलग गिरोह स्थापित कर लिया था. जानकर बताते हैं कि सुबोध सिंह से भी बड़ा गिरोह बनाने के लिए मनीष गोहाटी में एक गिरोह के संपर्क में आ कर AK 47 का खरीद किया था, गिरोह को हथियार के साथ मजबूत बनाने में लगा मनीष अपने साथी के साथ बिहार एसटीएफ के साथ हुए मुठभेड़ में मार गिराया गया था.

#बिहार पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रक्तबीज गिरोह बना सोना लूटेरा
बिहार पुलिस में लगातार हो रहे नए नए प्रयोग के बीच तंगहकीक़त ये है की अधिकांश थानेदारों के पास थाना क्षेत्र में रहने वाले अपराधकर्मियों की जानकारी नहीं है, नए प्रयोग में बने को कोतवाल अपराध पर लगाम के लिए जेल से छूटने वाले अपराधी पर नजर नहीं रख रहे हैं. हद तो ये, सुर्ख़ियों में रहने के लिए सजा के रूप में जिला से जो ट्रांसफर हो चुके वह खुद को कप्तान की नजर में सुर्खुरू बने रहने के लिए दूसरे जिला से अपना इनपुट देते हैं, जब की वास्तविकता वैसे लोगों की ये रहे है की जिला में बड़े थाना से नापे गए तो और फिर सर्किल में समय काटे. फिर कोतवाल बने तो बड़े साहब के करीबी बन बड़े खेल में जुटे रहे ऐसी चर्चा के बीच जिले से नप गए. ऐसे में बड़ा सवाल है की सोना लूटेरों के गिरोह पर नजर रखे तो कौन रखे ? सोना लूटेरे अपने मनसूबे में बड़े आराम से हो जा रहे हैं कामयाब