“बोली की बोली” में ले कर आए हैं एक जेल के ऊंचे दीवारों के अंदर की वह कहानी जो पढ़ कर आप समझ जाएंगे की आज भी अंग्रेजो के जमाने के जेलर मौजूद हैं और जेल के अंदर मौज की जगह बंदी को करना पर रहा है सख्त नियमो का पालन … बात एक बड़े एटीएम फ्रॉड की है .. फ्रॉड ऐसा जो एटीएम क्लोन गिरोह का सरगना है .. इस गिरोह में कई सदस्य हैं .. शौक़ीन ऐसा रहा जेल के बाहर की एक ब्रांडेड कपड़ा को दूसरी बार नहीं पहनता था … अवैध कमाई के धन को खर्च करने के लिए घुंघरुओं की झंकार और तबले की थाप वाले इलाके में कई हसीनाओं को अपने इर्द गिर्द रख जुल्फों के रोमांटिक खुशबुओं के बीच अपनी हवस की आग को कम करता था

कभी कभी तमाम शातिराना अंदाज पर कोई न कोई हावी जो जाता है .. एटीएम फ्रॉड के जिले में लम्बे कद वाले आईपीएस से बच नहीं सका … लम्बे कद वाले सिर्फ लम्बाई में ही नहीं आगे हैं ये जनाब तो कानून के लंबे हाथ के साथ इंजीनियरिंग में माहिर है …. तकनीक में माहिर लम्बू आईपीएस इस अपराधी के लिए बन गए लम्बू दादा … अब जेल के अंदर पहुंचा फ्रॉड तो वहां भी अपनी धाक जमा लिया … लेकिन एक वर्दी से रिटायर हो कर दूसरी वर्दी धारण करने वाले एक पदाधिकारी के सामने भात यानी चावल पर ही सवाल खड़ा कर दिया … अब अंग्रेज के जमाने वाला सख्त बन चुका जेल के अंदर फ्रॉड को मिल गयी चावल से भात बनाने की ड्यूटी … कभी एटीएम से फ्रॉड कर धन कमाने वाला आज चावल के दानों को भात में तब्दील कर रहा है …. लम्बू साहब के कड़क पुलिसिंग के कार्यकाल में अब बाहर आने का सपना भी नहीं देखता … फ्रॉड IPS के कार्यकाल खत्म होने का इंतजार कर – कर के भात बना रहा है